सोयाबीन की खेती कैसे होती है | Soybean farming

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इस आर्टिकल में जानेगे की सोयाबीन क्या है, सोयाबीन की खेती ( Soybean farming ) कब होती है, सोयाबीन की खेती कैसे करे, सोयाबीन की खेती सबसे ज्यादा कहा की जाती है, बीज के प्रकार, सोयाबीन की खेती का उत्पादन, खर्च एवं लागत और सोयाबीन की खेती से जुड़े कुछ सवाल जवाब के बारे में जानेगे।

सोयाबीन की खेती

सोयाबीन की खेती भारत में बहुत तेजी से की जा रही है। क्योकि सोयाबीन का मांग दिन प्रतिदिन भारत के बाजारों में बढ़ता जा रहा है।

सोयाबीन एक तेलीय फसल है। साथ ही इसमें अनेक प्रकार के पोषकतत्व भी पाए जाते है। लोग सोयाबीन के वडी की सब्जी भी बनाते है तथा इसके बीजो से जो तेल निकलता है उसका भी उपयोग खाना बनाने में करते है।

भारत में सोयाबीन की खेती मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा की जाती है तथा मध्यप्रदेश के इंदौर में सोयाबीन का रिसर्च सेंटर है। परन्तु धीरे धीरे दूसरे राज्यों में भी इसकी खेती की जाने लगी है।

सोयाबीन में भरपूर मात्रा में पोषकतत्व होते है जिससे यह लोगो के स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है।

Table of Contents

सोयाबीन क्या है

सोयाबीन एक तिलहन एवं दलहन फसल है। इस फसल में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, वासा ( चर्बी ) तथा कार्बोहाइड्रेट पाए जाते है। जिसका उपयोग हम भोजन में करते है। कई लोग इसकी सब्जी भी बनाते है।

सोयाबीन के तेल में लिनोलिक अम्ल एवं लिनालेनिक अम्ल पाया जाता है जो पेट में पाये जाने वाले कीटाणुओ के नष्ट करने में मददगार साबित होता है।

सोयाबीन का सेवन करने से खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी कम होती है जिससे हार्टअटैक जैसी समस्या भी उत्पन नहीं होती है। साथ ही सोयाबीन में प्रोटीन की मात्रा अधिक होने से प्लाज्मा लिपिड पर भी प्रभाव पड़ता है।

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भारत में सोयाबीन की खेती कहाँ होती है

राज्य लाख हेक्टर
मध्यप्रदेश 62.605
महाराष्ट्र 38.704
राजस्थान 10.588
आंध्रप्रदेश 2.840
कर्नाटक 2.470
छत्तीसगढ़ 1.560
गुजरात .930

सोयाबीन के बीज के प्रकार | Types of Soybean Seeds

भारत में कई प्रकार की सोयाबीन के बीज की खेती की जाती है परन्तु उनमे से कुछ ज्यादा उत्पादन देने वाली बीज है जो निम्नप्रकार से है।

  • KDS 344 ( फुले अंग्रणी )
  • KDS 726 ( फुले संगम )
  • KDS 753 ( फुले किमया )

KDS 344 ( फुले अंग्रणी )

इस बीज की खेती वहां ज्यादा अच्छी मानी जाती है जहां पानी की सुविधा हो क्योकि इस बीज की खेती में अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

यदि वर्षा न भी हुई तो भी खेत में पानी नमी के लिए आवश्यक होना चाहिए। इस बीज के उत्पादन में 130 से 140 दिन लगते है।

KDS 726 ( फुले संगम )

इस बीज की खेती करना वहां फायदेमंद होता है जहां अधिक पानी न हो परन्तु पानी कम भी न हो अर्थात मध्यम स्तर पर पानी हो।

KDS 726

इस बीज की खेती भारत में कही पर भी की जा सकती है केवल उनके पास सिचाई की सुविधा होनी चाहिए। इस बीज के उत्पादन में 100 से 105 दिन लगते है।

KDS 753 ( फुले किमया )

KDS 753

इस बीज की खेती कम पानी वाली जगह पर सरलता से की जा सकती यदि जिन क्षेत्रो में पानी कम है परन्तु उन्हें सोयाबीन का उत्पादन करना है वह इस बीज की मदद से सोयाबीन की खेती कर सकता है।

इस बीज के उत्पादन में 90 दिन का समय लगता है।

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सोयाबीन की खेती कैसे करे

सोयाबीन की खेती निम्न तैयारी के साथ की जाती है।

सोयाबीन की खेती के लिए भूमि चयन एवं तैयारी

सोयाबीन की फसल की खेती के लिए दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। थोड़ी नमी वाली जमीन होनी चाहिए साथ ही जमीन का PH भी 7.5 से 8 के बीच में होना चाहिए।

सोयाबीन का फसल ऐसी जमीन में नहीं उगाया जा सकता जहा पानी के निकाल की कोई व्यवस्था न हो। क्योकि इसकी खेती करते समय पानी का संग्रह नहीं होना चाहिए।

सोयाबीन की खेत की तैयारी

इसकी खेती के लिए जमीन की जुताई करवानी चाहिए। जिससे जमीन में पथरीलापन न रहे है। जमीन की जुताई करने के बाद उसके ऊपर हमें पाटा चलाना चाहिए।

जिससे जमीन समतल बन जाए तथा भुरभुरी बन जाए क्योंकि भुरभुरी जमीन में बीज अंकुरित होने में आसानी होती है। साथ ही खेतो में नाली बनवानी चाहिए और नालियों के बीच में 3.5 इंच का अंतर होना चाहिए।

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सोयाबीन के खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

सोयाबीन की खेती के लिए नमी वाली जलवायु उपयुक्त मानी जाती है अर्थात ना अधिक गर्मी और ना ही अधिक ठंडी होबादलों वाले मौसम को इसकी खेती के लिए उचित माना जाता है।

इसकी खेती के लिए 25º सेल्सियस से 30° सेल्सियस वाला तापमान उचित होता है तथा नमी 70% से 80% जितनी होनी चाहिए। साथ ही बादलीय वातावरण होना आवश्यक है।

सोयाबीन की बुवाई

सोयाबीन की बुवाई के लिए जो खेत तैयार किया गया है उसमें 3.5 इंच की नाली बनाई जाती है तथा नाली के बाजू में 3.5 की ऐसी मेड़ बनाई जाती है जो नाली से थोड़ी ऊंचाई पर है उस मेड़ में वर्षा का पानी या सिंचाई का पानी इकट्ठा ना हो।

सोयाबीन के बीज की बुवाई का सबसे अच्छा समय 1 जून से 10 जून के बीच में माना जाता है। क्योकि इस समय न ज्यादा गर्मी होती है और न ही अधिक वर्षा। परन्तु यह अलग अलग जगह के जलवायु पर आधारित होता है। इसलिए जून से जुलाई के महीनो में इसकी बुवाई कर देनी चाहिए

सोयाबीन की बीजो की बुआई

उस मेड़ के दोनों किनारो पर सोयाबीन के बीजो की बुवाई करनी है। सोयाबीन के बीजों की बुवाई के लिए गड्ढों के बीचो में 9 इंच का अंतर होना चाहिए तथा प्रत्येक गड्ढों में 2 से 3 सोयाबीन के बीज डालने हैं।

सोयाबीन के बीज की मात्रा गड्ढों में कितनी होगी यह सोयाबीन के बीज के जर्मिनेशन पर आधारित होता है।

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सोयाबीन के बीज का जर्मिनेशन क्या है

सोयाबीन की खेती के लिए भी जिस प्रकार की बीज को खरीदा है तो उसमें से आपको 50 दाने निकाल लेने हैं तथा एक गीली बोरी लेनी है

उस बोरी में आपने जो बीज निकाले है उसे फैला कर तथा बंद करके रखना है और 2 से 3 दिन तक उस बोरी में नमी बनाने के लिए पानी का छिड़काव करते रहना है।

जब उस बोरी में बीज को 4 से 5 दिन हो जाए तब आपको देखना है कि आपने 50 बीजों को रखा था उसमें से कितने बीज अंकुरित हुए।

यदि 40 बीज भी अंकुरित हो जाते हैं तो यह काफी अच्छा संकेत है की इस बीज का उत्पादन अधिक होगा साथ ही आपको बुवाई करते समय गड्ढों में कितना बीज डालना है उसका अंदाजा भी लग जाएगा।

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सोयाबीन के बीज की मात्रा एवं प्रक्रिया

मात्रा

सोयाबीन की खेती के लिए 15kg बीज की मात्रा प्रति एकड़ लगती है और यदि आप सीड ड्रिलिंग मशीन से बीज की बुवाई करते है तो उसमे 30kg बीज की मात्रा प्रति एकड़ लगती है।

प्रक्रिया

खेती में बीजो की बुवाई से पहले उस पर कुछ रसायनो का छिड़काव किया जाता है जिससे शुरुआती समय में खरपतवार की समस्या न हो।

बुवाई से पहले 15kg प्रति एकड़ के बीज में 250gm PSB ( Phosphate solubilizing bacteria ) और 250gm Rhizobium को 300ml पानी +100gm गुड़ में मिलाना है।

पानी में गुड़ को इसलिए मिलाया जाता है क्योकि गुड़ जो है वह पानी को चिपकाकर रखेगा जिससे जो रासाय हम बीजो में डालेंगे वो बीजो में लग जायेगा यदि गुड़ नहीं मिलाते तो पानी तो बह जाता और रसायन बीज पर बहुत कम मात्रा में लग पता।

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सोयाबीन की खेती के लिए खाद

सोयाबीन की खेती में खाद कब डालना है यह दिनों के हिसाब से निश्चित किया जाता है। जिससे समय समय पर खाद का छिड़काव करने से फसल में कीटाणुओं एवं खरपतवार की समस्या नहीं होती है।

जब खेत में नाली बनायीं जाती है तभी हमें single super phosphate जो की 150kg प्रति एकड़ हिसाब से डालना है तथा इसके आलावा Neem cake / Nimboli pend ( नीम की पत्ती ) 50kg प्रति एकड़, sulfur 10kg प्रति एकड़ तथा potash 25kg प्रति एकड़ जुताई के समय ही डालना होता है।

सोयाबीन की खेती करने से पहले मिट्टी की जांच ( soil testing ) कराना बहुत जरुरी है क्योकि मिट्टी की जांच करने से पता चलेगा की हमारी मिट्टी किस प्रकार की है तथा मिट्टी में किस खाद की आवश्यकता है।

साथ ही मिट्टी का PH कितना है यह भी पता चलेगा। यदि मिट्टी का PH सोयाबीन की खेती के उपयुक्त PH से अधिक हो तो उसको कम करने के लिए जिप्सम को मिट्टी में डालना पड़ेगा

सोयाबीन की खेती में खाद को डालने के Steps

खेती में बीज की बुवाई के बाद खाद को निम्नलिखित steps के हिसाब से डाले।

पहला स्प्रे खरपतवार खत्म करने के लिए

सोयाबीन के बीजो की बुवाई करने के 24 घंटे के अंदर oxyfluorfen को 1ml प्रति लीटर में मिलाकर डालना है अब पानी आपको आपके एकड़ के हिसाब से लेकर खेत में छिड़काव करना है।

oxyfluorfen का छिड़काव खरपरवार को खत्म करने के लिए डाला जाता है।

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दूसरा स्प्रे कीटनाशक एवं जंतुनाशक के लिए

जब सोयाबीन के बीजो की बुवाई को 10 दिन हो जाये तब दूसरा स्प्रे का छिड़काव करना है और यह छिड़काव कीटनाशक एवं जंतुनाशक दवाओं का होता है।

10 दिन के बाद आपको chlorpyrifos50 1ml/लीटर मिलाकर छिड़काव करना है और यदि यह जैविक खेती बनाना है तो नीमार्क का छिड़काव करना है।

chlorpyrifos50 के छिड़काव के 25 से 26 दिन बाद 19:19:19 4gm/लीटर और micronutrients 39ml/लीटर के हिसाब से छिड़काव करना पड़ता है।

तीसरा स्प्रे फूल एवं पत्ते के रोगो के लिए

सोयाबीन की खेती को जब 40 से 45 दिन हो जाये और सोयाबीन के पौधों में 5% फूल जाये तब ही हमको सोयाबीन की खेती में तीसरा स्प्रे को शुरू करना है।

सोयाबीन के पत्तो का रोग

45 दिन बाद फूल के कीड़ो के लिए 12:61:00 को 4gm/लीटर के हिसाब से छिड़काव करना है और पत्तो के रोग के लिए chlorpyrifos50 का 2ml/लीटर के हिसाब से छिड़काव करना है।

NOTE : तीसरे स्प्रे के बाद 70 दिन तक कोई भी रासायनिक व अन्य प्रकार की दवा का छिड़काव नहीं करना है यदि आप करते है तो आपके उत्पादन में 20% की कमी हो जाएगी।

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चौथा स्प्रे फूल खत्म और फली की शुरुआत पर

अब तक सोयाबीन की खेती में तीन स्प्रे हो गया है अब आपको खेत में चौथे स्प्रे की तैयारी शुरू कर देनी है। यह स्प्रे तब ही करना है जब पौधे में से फूल जा चुके हो और फली आने लगी हो।

आपको चौथे स्प्रे में 00:52:34 को 5gm/लीटर और M45 को 2gm/लीटर का छिड़काव करना है।

पांचवा स्प्रे सोयाबीन के रंग एवं वजन के लिए

सोयाबीन की खेती में रसायनो का यह अंतिम छिड़काव होता है। यह छिड़काव 80 से 85 दिन बाद होता है। इस छिड़काव में 00:00:50 का 7gm/लीटर के हिसाब से करना पड़ता है।

यह अंतिम स्प्रे होता है इसलिए इसके डोज थोड़ा ज्यादा होता है क्योकि इतने दिन में पौधा इतने रासायन को झेलने के लिए तैयार हो जाता है।

सोयाबीन की खेती की सिंचाई

सोयाबीन की खेती की बुवाई वर्षा के समय में होती है इसलिए सिचाई अन्य फसलों की तुलना में कम करनी पड़ती है। यदि वर्षा ना हुई हो तो एक बार बुवाई से पहले खेत में नमी बनाने के लिए सिचाई करनी पड़ती है।

उसके बाद मिट्टी में नमी बनाने के लिए खेत में सिचाई करते रहना चाहिए। बस ध्यान रखे की ज्यादा मात्रा में खेत म पानी न हो नहीं तो सोयाबीन के जड़ का सड़ने का डर होता है।

सोयाबीन की खेत की सिंचाई

फूल आने पर हलकी हलकी सिचाई करनी चाहिये साथ ही फली तैयार होने पर एक से दो बार सिचाई करनी चाहिए। जिससे उत्पादन अच्छा होता है।

यदि खेत में अच्छा उत्पादन चाहिए तो सिंचाई के लिए ड्रिप फर्टिगेशन का उपयोग करना चाहिए साथ ही 50 से 60 दिन के बाद खेत में खरपतवार हो जाये तो Ammonium sulfate 40kg और Sulfur WDG का उपयोग 10 दिन में करना चाहिए।

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सोयाबीन की मार्केटिंग

सोयाबीन की खेती केवल भारत देश में नहीं बल्कि पुरे विश्व में की जाती है और इस फसल को स्वस्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।

यदि सोयाबीन की खेती में अच्छा मुनाफा चाहते हो तो इसकी कटाई के तुरंत बाद इसको बाज में बेचना नहीं चाहिए। क्योकि भारत में सोयाबीन की कटाई सितम्बर से अक्टूबर के महीने है।

उस समय सभी किसान अपनी अपनी फसलों को बाजार में बेच देते है जिससे बजार में सोयाबीन का स्टॉक बहुत ज्यादा हो जाता है और थोक विक्रेता किसानो को बहुत कम भाव देते है।

जनवरी से फरवरी के महीने में बाजार में अमेरिका की सोयाबीन का समय आ जाता है और अप्रैल से मई में चीन का इसी तरह यह चैन चलती रहती है।

भारत के किसानो को फरवरी से मार्च तक रुक कर अपनी फसल को बेचना चाहिए जिससे उनको भी अच्छा मुनाफा होगा।

किसानो को सोयाबीन की फसल को अच्छे से सूखा लेना चाहिए फिर आप इस फसल को कुछ दिन तक नहीं भी बेचोगे तो यह खराब नहीं होगी।

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सोयाबीन की खेती में खर्च, लागत और उत्पादन

सोयाबीन की खेती आप कितने एकड़ जमीन में कर रहे है इस हिसाब से खर्च आता है और आपकी खेती में कितना उत्पादन हो रहा है साथ ही आपको बाजार से आपकी फसल का कितना भाव मिल रहा है उस पर निश्चित होता है।

यदि आपने आपके खेत में 1 लाख पौधा प्रति एकड़ के हिसाब से लगया है और हर पौधे से आपको 25gm सोयाबीन का उत्पादन प्राप्त होता है। तो आपको 20 क्विंटल प्रति एकड़ का उत्पादन प्राप्त होगा।

किसानो को प्रति एकड़ 20 से 30 हजार जितना खर्चा आता है। इस खर्च में बीज खरीदने से लेकर ट्रांसपोर्ट तक के खर्चे को गिना गया है।

बाजार में सोयाबीन के फसल को 3000 से 3500 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचा जाता है। इस हिसाब से आपको 70 हजार से 80 हजार जितनी लागत आती है। इसमें से अपना खर्चा निकाल ले तो हमें 50 हजार से 60 हजार प्रति क्विंटल का मुनाफा होगा।

सोयाबीन की खेती से जुड़े सवाल जवाब ( FAQ )

सोयाबीन की खेती कब की जाती है?

सोयाबीन की खेती जून से जुलाई के महीने में की जाती है परन्तु 1 जून से 10 जून का समय ज्यादा अच्छा माना जाता है।

सोयाबीन की खेती सबसे ज्यादा कहा की जाती है?

सोयाबीन की खेती भारत में सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में की जाती है।

सोयाबीन के बीज कहाँ से प्राप्त होंगे?

सोयाबीन के बीज आपके क्षेत्र में बीजो की दुकान से या फिर ऑनलाइन Amazon की वेबसाइट से भी प्राप्त हो सकते है।

सबसे ज्यादा कौनसी सोयाबीन में पैदावार होती है?

सबसे ज्यादा KDS 726 ( फुले संगम ) सोयाबीन की पैदावार होती है।

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